कॉन्डोम को ना, बांग्लादेश में रोहिंग्या मुसलमानों की नसबंदी


पड़ोसी देश म्यांमार से सबकुछ छोड़कर बांग्लादेश पहुंचे रोहिंग्या मुसलमानों की नसबंदी कराई जाएगी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फैमिली प्लानिंग ऑथोरिटी ने सरकार ने ऐसा करने को कहा है. हालांकि, यह अनिवार्य नहीं होगा. आइए जानते हैं पूरा मामला…

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जनसंख्या नियंत्रण के लिए इससे पहले अधिकारियों ने कॉन्डोम को बढ़ावा देने की कोशिश की थी. लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हुआ.

अधिकारियों का कहना है कि रोहिंग्या मुस्लिम कॉन्डोम का इस्तेमाल करने से हिचकते हैं, इसकी वजह से अब तक सिर्फ 549 कॉन्डोम पैकेड ही बांटे जा सके हैं.

कई महिलाओं ने मीडिया से कहा है कि उनके पति कॉन्डोम के इस्तेमाल को ठीक नहीं मानते.

रिपोर्ट के मुताबिक, बीते कुछ महीनों में 6 लाख से अधिक रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश के रिफ्यूजी कैंप में पहुंचे हैं.

हालांकि, बांग्लादेश में कुल रोहिंग्या रिफ्यूजी की संख्या 10 लाख बताई जा रही है.

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि रोहिंग्या लोगों में बर्थ कंट्रोल को लेकर बहुत कम जागरुकता है.

एक अधिकारी ने कहा कि कई रोहिंग्या पैरेंट्स के 19 तक बच्चे हैं और कई पुरुषों की एक से अधिक पत्नी हैं.

इसके बाद अधिकारियों ने महिला और पुरुष, दोनों के लिए ही नसबंदी कराने की योजना शुरू करने की इजाजत मांगी है.

हालांकि, नसबंदी को लागू कराने में मुश्किल आ सकती है.

कई रिफ्यूजी मानते हैं कि बड़े परिवार होने से उनका कैंपों में रहना आसान होगा.

कई परिवार में बच्चों को दूर से पानी और अन्य सामान लाने के लिए भेजा जाता है.

कई रिफ्यूजी यह भी मानते हैं कि कॉन्डोम का इस्तेमाल करना इस्लाम के खिलाफ है.

म्यांमार में बर्थ कंट्रोल के लिए ये लोग डर से क्लिनिक विजिट नहीं करते थे, क्योंकि उन्हें डर था, नुकसान पहुंचाने वाली दवा दे दी जाएगी.

7 बच्चों की मां सबुरा ने कहा कि उनके पति को लगता है कि बड़े परिवार वे पाल सकते हैं.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के नागरिकों के बीच नसबंदी योजना सफल मानी जाती है.

कॉक्स बाजार में हर महीने करीब 250 लोग नसबंदी कराते हैं.

नसबंदी कराने वाले पुरुषों को यहां 1800 रुपये और लुंगी दिया जाता है.

लेकिन गैर बांग्लादेशी लोगों की नसबंदी कराने के लिए एक कमेटी की इजाजत लेनी पड़ेगी. इस कमेटी के अध्यक्ष स्वास्थ्य मंत्री हैं.

रोहिंग्या मुसलमानों से जुड़ा हुआ बर्थ डाटा उपलब्ध नहीं हैं. क्योंकि उन्हें म्यांमार की जनगणना में शामिल नहीं किया जाता है.
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