भीमकुण्ड: भारत का एक ऐसा रहस्य, जिसके आगे सभी ने घुटने टिकाए


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मध्य प्रदेश के माजरा गांव के पास स्थित भीमकुण्ड एक धार्मिक स्थल है। वैज्ञानिकों के लिए यह जगह एक बेहद ही रहस्यमई जगह बनी हुई है। Discovery चैनल वालों ने इस कुण्ड का रहस्य जानने के लिए गोताखोरों से गताखोरी करवाई लेकिन असफलता की हाथ लगी। इस कुण्ड का वर्णन पुराणों में भी है। पुराणों में इस कुण्ड का नाम नीलकुण्ड बताया जाता है। इस कुण्ड के बारे में लोग कहते है कि जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आने वाली होती है, तो इस कुण्ड का जलस्तर अपने आप ही बढ़ने लगता है। नेपाल और गुजरात में आए भयानक भूकंप से पहले भी यहां का जलस्तर बढ़ने लगा था और 2004 में सुनामी के दौरान इस कुण्ड में 12 से 15 मीटर ऊंची लहरें उठ रही थी।

जिसकी वजह से यह पूरी दुनिया के लिए आश्चर्य का विषय बन गया था। कुण्ड के इस राज को सुलझाने के लिए डिस्कवरी चैनल वालों ने यहाँ अपने गोताखोरों को भेजा, पर इन गोताखोरों को ना तो इस कुण्ड की गहराई का पता चल पाया और ना ही इसमें उठने वाली लहरों के राज के बारे में कुछ पता चला। कुछ गोताखोरों ने बताया कि जब वे इस कुण्ड में थोड़ी गहराई तक गए तो पता चला के पानी के नीचे दो कुण्ड है। जिनमे से एक से पानी निकलता है और दूसरे से पानी चला जाता है। गोताखोरों के अनुमान के मुताबिक यह कुण्ड एक समुद्र से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण इसमें लहरें उठने लगती हैं, लेकिन सही रहस्य कोई नहीं जान पाया। पहाड़ी के नीचे एक गुफा में स्थित यह कुण्ड इस तरह से बना हुआ है कि इस पर सूरज की किरणें सीधी एक दिशा में पड़ती है और जब इस कुण्ड पर सूरज की किरणें सीधी पड़ती है, तब इस कुण्ड का पानी कई रंगों में चमक उठता है।

भीमकुण्ड के इतिहास की बात करें तो कहा जाता है कि पांडव अज्ञातवास के दौरान पहाड़ों एवं जंगलों में अपना आसरा खोजते थे। एक समय पांडवो के पास शुद्ध पानी का स्रोत खत्म हो गया। वे पानी की तलाश में चलते-चलते एक पहाड़ी के पास रुक गए। द्रोपती को प्यास लगी थी और उसने पानी पीने की इच्छा जताई। तब भीम ने उस पहाड़ी पर प्रहार किया और उस पहाड़ी की जमीन नीचे धंस गई। उसके बाद वहां से एक जलधारा निकली और उसका पानी पीकर ही पांडवों और द्रौपदी ने अपनी प्यास बुझाई थी। इसीलिए इस कुण्ड को “भीमकुण्ड” भी कहा जाता है। इस कुण्ड की सबसे खास बात यह है कि इस कुण्ड का पानी हमेशा साफ और नीले रंग का रहता है।

आपने देखा होगा कि जब कोई व्यक्ति पानी में डूब जाता है, तो कुछ समय बाद उसकी लाश पानी के ऊपर तैरने लगती है, लेकिन इस कुण्ड में ऐसा बिल्कुल नहीं होता है। इस कुण्ड के पानी में जब भी कोई डूब जाता है, तो वह कभी वापस नहीं आता।

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